मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब दूसरे हफ्ते में पहुंच गई है. अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को जब ईरान पर हमला किया और उसके सुपीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को खत्म कर दिया तो ये जंग दो-चार दिन की बात लग रही थी. हालांकि ऐसा हुआ नहीं और दुनिया की सबसे तेज मानी जाने वाली खुफिया एजेंसी मोसाद और इजरायली सेना ईरान की घेराबंदी में जुट गई. दूसरी तरफ ईरान भी झुकने को तैयार नहीं है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी ईरान के आत्मसमर्पण को लेकर लगातार डीकें हांक रहे हैं.
तेल की कीमतों में भी लगी आग
ट्रंप कभी ये कह रहे हैं कि ईरान खाड़ी के बाकी मुस्लिम देशों के माफी मांग रहा है तो कभी कहते हैं कि अमेरिका फिर से तेहरान पर जोरदार हमला करेगा. एक दिन पहले ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ कोई भी समझौता तभी होगा जब वह बिना शर्त के सरेंडर करे. इस युद्ध का सीधा असर तेल पर पड़ रहा है. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से पूरी दुनिया के तेल का कारोबार होता है. भारत का 50 फीसदी तेल इसी रास्ते आता है. इसका असर ये हुआ कि तेल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल से 93 डॉलर पर आ गए. तेल के दाम 1 डॉलर बढ़ने पर पेट्रोल की कीमत 55 पैसे बढ़ जाती है.
रूसी तेल खरीद को लेकर भारत का यूएस को जवाब
ट्रंप का कहना है कि तेल की कीमत बढ़े तो उन्हें इसकी कोई परवाह नहीं है. अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा कि ईरान जंग की वजह से भारत रूस से 30 दिनों के लिए कच्चा तेल खरीद सकता है. इस पर भारत सरकार का जवाब भी सामने आया है. केंद्र ने कहा है कि नई दिल्ली को इस तरह की खरीदारी के लिए किसी भी देश से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है. सरकार ने कहा, ‘भारत रूसी तेल खरीदने के लिए कभी किसी देश की अनुमति पर निर्भर नहीं रहा है. भारत फरवरी 2026 में भी रूसी तेल का आयात जारी रखेगा और रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहेगा.
घरेलू रसोई गैस की कीमतों में उछाल
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल के बीच शनिवार को घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की कीमत में 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 114.5 रुपये की भारी बढ़ोतरी हुई. इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली में अब गैर-सब्सिडी वाली एलपीजी का 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर 913 रुपये में मिलेगा, जबकि पहले इसकी कीमत 853 रुपये थी. एक साल से भी कम समय में कीमत में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है.


