दिल्ली में यमुना के निरीक्षण के लिए वीआईपी बोट खरीदने जा रही सरकार ने फैसला वापस ले लिया है. एबीपी न्यूज़ ने इस संदर्भ में सबसे पहले खबर दिखाई थी. अब सूत्रों का दावा है कि सरकार के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने वीआईपी एसी बोट खरीदने का टेंडर वापस ले लिया है.
बताया जा रहा है कि मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा की आपत्ति के बाद यह फैसला लिया गया. दरअसल यह बोट बाढ़ के दौरान निरीक्षण और यमुना की सफाई की मॉनिटरिंग के लिए खरीदी जानी थी. प्रस्तावित बोट में एसी केबिन, पेंट्री, पानी स्टोरेज और आरामदायक कुर्सियों की व्यवस्था के साथ करीब 400 लीटर पानी का स्टोरेज रखने की क्षमता भी थी. बोट के पिछले हिस्से में डेक के पास एक ओपन स्पेस भी बनाया जाना था, जहां बैठकर मीटिंग और निरीक्षण किया जा सकता था.
इस टेंडर को लेकर आम आदमी पार्टी ने भी सवाल उठाए थे और आरोप लगाया था कि जिस वीआईपी कल्चर को खत्म करने के लिए पहले इस प्रस्ताव पर रोक लगाई गई थी, उसी तरह की सुविधा को मंजूरी देकर रेखा सरकार खुद वीआईपी कल्चर को बढ़ावा दे रही है.
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने साधा था निशाना
बता दें यमुना की मॉनिटरिंग के लिए दो वीआईपी बोट खरीदने के लिए टेंडर जारी करने के दिल्ली सरकार के फैसले पर कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था कि जैसे अरविंद केजरीवाल ने शीश महल बनवाया था, वैसे ही अब बीजेपी दिल्ली में “शीश महल बोट” का एक नया वर्जन लेकर आ रही है. अभिषेक दत्त ने कहा कि सरकार को इस फैसले पर शर्म आनी चाहिए, क्योंकि उनकी प्राथमिकता यमुना की सफाई होनी चाहिए थी, न कि ऐसी वीआईपी सुविधाओं वाली बोट खरीदना.
दिल्ली सरकार के सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से वीआईपी एसी बोट खरीदने के टेंडर को लेकर आम आदमी पार्टी ने भी सरकार पर निशाना साधा था. पूर्व जल मंत्री और आप के प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया था कि बीजेपी एक तरफ वीआईपी कल्चर खत्म करने की बात करती है, लेकिन रेखा सरकार खुद उसी वीआईपी कल्चर को बढ़ावा दे रही है. उन्होंने कहा था कि जब वह जल मंत्री थे तब इसी विभाग के तीनों अधिकारी उनके साथ घंटों धूप और बारिश में खड़े होकर काम करते थे, ऐसे में अब वीआईपी सुविधाओं वाली नाव खरीदने की जरूरत समझ से परे है.
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया था कि यह नाव मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा के लिए मंगवाई जा रही थी और दो नाव खरीदने का प्रस्ताव इसलिए था ताकि एक मंत्री के लिए और दूसरी मुख्यमंत्री के लिए इस्तेमाल हो सके. उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री को एसी में रहने की आदत हो गई है और इसी वजह से ऐसी सुविधाओं वाली नाव खरीदने की बात की जा रही है.


