भारत में ब्रिटिश उपनिवेश का रास्ता बनी ईस्ट इंडिया कंपनी को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. कंपनी एक बार फिर से बंद हो गई है. हाल ही में लंदन में एक लग्जरी रिटेल के तौर पर काम कर रही थी. इस कंपनी को 2010 में एक लग्जरी खाने-पीने की रिटेलर के तौर पर शुरू किया गया था. द संडे टाइम्स की मानें तो कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया गया है. इससे पहले भी एक बार ईस्ट इंडिया कंपनी दिवालिया होने से बच गई थी.
दुनिया की पहली मल्टीनेशनल कॉर्पोरेशन
साल 1857 में ईस्ट इंडिया कंपनी को दुनिया की पहली मल्टीनेशनल कॉर्पोरेशन कहा जाता है. 1857 में विद्रोह खत्म हुआ था. तब ब्रिटिश क्राउन ने कंपनी को अपने में मिला लिया था. उसकी निजी सेना को खत्म कर दिया गया था.
भारतीय एंटरप्रेन्योर ने दोबारा शुरू की थी कंपनी
इस कंपनी को साल 2010 में भारतीय एंटरप्रेन्योर संजीव मेहता ने फिर से शुरू किया था. साल 2000 के दशक की शुरुआत में इस कंपनी के राइट्स खरीदे थे. ताकि इसे होलसेल वेंचर के तौर पर फिर से शुरू किया जा सके. 2010 में मेहता ने मेफेयर में 2 हजार स्क्वायर फीट साइज का एक स्टोर खोला. इसमें कन्फेक्शनरी और फोर्टनम एंड मेसन की तरह ही प्रीमियम सामान मिलते थे.
कंपनी पर छह लाख पाउंड बकाया था कंपनी पर
कंपनीज हाउस की फाइलिंग से पता चला है कि ईस्ट इंडिया कंपनी लिमिटेड ने पिछले साल अक्टूबर में लिक्विडेटर अपाइंट किए थे. इस फर्म पर अपनी पेरेंट कंपनी का 6 लाख पाउंड बकाया था. इसकी टैक्स देनदारी करीबन 1,93,789 पाउंड थी. कर्मचारियों पर कुल बकाया 163,105 पाउंड था. दिवालिया होना अब ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए अंत का समय है. ब्रांड की वेबसाइट अब एक्टिव नहीं है. 97 न्यू ब्रांड स्ट्रीट का पुराना स्टोर भी खाली है.


