Saturday, January 17, 2026
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ईरान संकट का उत्तर प्रदेश पर सीधा असर! दांव पर लगा 1500 करोड़ का कारोबार, किसान से व्यापारी तक सब परेशान


ईरान संकट ने हिलाया...- India TV Paisa

Photo:CANVA ईरान संकट ने हिलाया यूपी का बाजार!

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़ी वैश्विक उथल-पुथल का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। इसका सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश पर पड़ रहा है, जो खेती और खाद्य उत्पादों के निर्यात में आगे है। हालात ऐसे हो गए हैं कि यूपी से ईरान भेजा जाने वाला करीब 1500 करोड़ रुपये का कारोबार खतरे में आ गया है। इस वजह से किसान, व्यापारी और निर्यातक सभी परेशान हैं और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

उत्तर प्रदेश से लंबे समय से ईरान को बासमती और गैर-बासमती चावल, फल-सब्जियां, दवाइयां, कपड़े, पशु आहार और इंजीनियरिंग से जुड़े उत्पादों का निर्यात होता रहा है। लेकिन मौजूदा हालात में सबसे ज्यादा मार चावल के कारोबार पर पड़ती दिख रही है। निर्यातकों के मुताबिक, कई कंसाइनमेंट या तो रास्ते में ही दूसरे देशों के बंदरगाहों पर रोक दिए गए हैं या फिर गुजरात के कांडला पोर्ट पर डंप पड़े हैं। भुगतान और डिलीवरी को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से अब तक 200 करोड़ रुपये से ज्यादा के ऑर्डर रद्द हो चुके हैं।

बासमती कारोबार संकट

मेरठ स्थित बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान, मोदीपुरम के संयुक्त निदेशक डॉ. रितेश शर्मा के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत ने ईरान को करीब 6400 करोड़ रुपये मूल्य के बासमती चावल का निर्यात किया था। पहले से ही ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण व्यापार प्रभावित था, लेकिन अब बढ़ते तनाव ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। निर्यातकों को आशंका है कि अगर नए प्रतिबंध लगाए गए तो कारोबार पूरी तरह ठप हो सकता है।

यूपी के शहर प्रभावित

कानपुर में भारतीय निर्यात परिषद के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव का कहना है कि ईरान पर संभावित नए प्रतिबंधों की आशंका ने जोखिम कई गुना बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर कानपुर, गाजियाबाद, सीतापुर, लखीमपुर और सिद्धार्थ नगर जैसे जिलों पर पड़ेगा, जहां बड़ी संख्या में किसान और व्यापारी चावल व कृषि उत्पादों के निर्यात पर निर्भर हैं।

किसान-निर्यातक की चिंता

कारोबारियों का कहना है कि अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो किसानों को उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिलेगा और निर्यातक भारी नुकसान झेलने को मजबूर होंगे। ऐसे में केंद्र सरकार से वैकल्पिक बाजार तलाशने, बीमा और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने की मांग तेज हो गई है। ईरान संकट ने साफ कर दिया है कि वैश्विक तनाव की एक चिंगारी भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को कितना बड़ा झटका दे सकती है।

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