
इस हफ्ते घरेलू शेयर बाजार की दशा और दिशा कई प्रमुख कारकों से तय होगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस हफ्ते अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों से जुड़ा फैसला भारतीय शेयर बाजार के रूझान को तय करने वाला प्रमुख कारक होगा। इसके अलावा वैश्विक गतिविधियां और विदेशी निवेशकों का रुख भी बाजार की भावना को प्रभावित करेगा। बताते चलें कि पिछले हफ्ते शेयर बाजारों में काफी सुस्ती रही, जहां प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी बिना किसी खास बदलाव के बंद हुए। पिछले हफ्ते बीएसई सेंसेक्स ने 5.7 अंक की मामूली बढ़त दर्ज की, जबकि एनएसई निफ्टी 16.5 अंक गिरकर बंद हुआ।
सीपीआई के आंकड़ों पर रहेगी बारीक नजर
रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा ने कहा, ”इस हफ्ते बाजार 12 दिसंबर को आने वाले भारत के सीपीआई के आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखेंगे। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर से जुड़े फैसले पर ध्यान रहेगा, जो उभरते बाजारों की जोखिम धारणा को प्रभावित कर सकता है।” निवेशक रुपये की चाल पर भी नजर रखेंगे, जो पिछले हफ्ते डॉलर के मुकाबले 90 रुपये के स्तर से नीचे चली गई थी। बताते चलें कि गुरुवार, 4 दिसंबर को रुपया 28 पैसे टूटकर अबतक के सबसे निचले स्तर 90.43 प्रति डॉलर पर पहुंच गया था।
रुपये में भारी गिरावट की वजह से बिकवाल बने विदेशी निवेशक
रुपये में जारी भारी गिरावट की वजह से विदेशी निवेशकों ने ताबड़तोड़ बिकवाली की। एफपीआई ने दिसंबर के पहले हफ्ते में भारतीय शेयर बाजारों से 11,820 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर पैसे निकाल लिए, जिसका दबाव साफतौर पर मार्केट में देखने को मिला। सिर्फ एक हफ्ते में 11,820 करोड़ रुपये की बिकवाली चिंता का विषय है।
शेयर बाजार के लिए काफी अहम रहेगा 9 और 10 दिसंबर
स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट प्रवेश गौर ने कहा कि निवेशकों का ध्यान अब पूरी तरह से 9-10 दिसंबर को होने वाली अमेरिकन फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक पर है। उन्होंने कहा, ”एफओएमसी के फैसले के साथ ही प्रमुख अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। 9 दिसंबर को जारी होने वाले अमेरिकी रोजगार के आंकड़ों से अमेरिकी श्रम बाजार के बारे में पता चलेगा।”


