‘इजरायल पर पाकिस्तान परमाणु हमला करेगा’ ये बयान देने वाले 71 साल के मोहसिन रेजाई को ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल के युद्ध के बीच अहम जिम्मेदारी दी है. मुज्तबा ने उन्हें अपना वरिष्ठ सैन्य सलाहकार चुना है. यह जानकारी ईरान की सरकारी एजेंसी मेहर ने सोमवार (16 मार्च) को दी है.
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व चीफ रहे, रेजाई पहले से ही रुढिवादी शासन में एक कट्टरपंथी सैन्य लीडर के तौर पर जाने जाते हैं. यह मुज्तबा खामेनेई की सोच से मेल खाता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि उनकी सोच उनके पिता और पूर्ववर्ती अली खामेनेई की तुलना में अधिक दक्षिणपंथी है.
रेजाई की नियुक्ति ऐसे समय की गई है, जब मिडिल ईस्ट में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल ने जंग छेड़ रखी है. इधर, रेजाई ने कहा है कि फारस की खाड़ी में अमेरिका ने पिछले पचास सालों से असुरक्षा बना रखी है. जबतक अमेरिका अपनी सेना वापस नहीं बुला लेता, और क्षेत्रीय देश विशेष रूप से ईरान और ओमान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का कंट्रोल अपने हाथों में नहीं ले लेते, तबतक वहां सुरक्षा सुनिश्चित करना असंभव है.
अपने बयानों के लिए जाने जाते हैं मोहसिन रेजाई
एक मार्च को जारी बयान में रेजाई ने कहा कि अमेरिकी जहाजों को अब खाड़ी में एंट्री नहीं दी जाएगी. यह होर्मुज में नौपरिवहन की स्वतंत्रता के लिए सीधी चुनौती थी. इसे तब से ईरान द्वारा अवरुद्ध कर दिया गया है.
रेजाई के अक्सर बयान काफी खतरनाक होते हैं. इससे पर जून में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले पर एक बड़ा दावा किया था. उन्होंने तब कहा था कि पाकिस्तान ने हमें आश्वासन दिया है. यदि इजरायल ईरान पर परमाणु बम का उपयोग करता है तो वे भी इजरायल परमाणु बम से हमला करेंगे. इसके अलावा उन्होंने दावा किया था कि तेहरान के पास ऐसी क्षमताएं मौजूद हैं, जो इंटरनेशनल कम्युनिटी से छ्पिाकर रखी गई हैं.
हालांकि, पाकिस्तान ने उनके इस दावे का खारिज कर दिया था. तब वहां के रक्षामंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने इसे बेबुनियाद और गैर जिम्मेदाराना बताया था. आसिफ ने इजरायल की निंदा की थी. तब इजरायल ने ईरान, यमन और फिलिस्तीन को निशाना बनाया. आसिफ ने कहा था कि यदि मुस्लिम राष्ट्र एकजुट नहीं होते हैं, तो हर किसी को उसी हश्र का सामना करना पड़ेगा. इसके अलावा पाकिस्तान ने खामेनेई की हत्या की भी निंदा की है.
IRGC के कमांडर इन चीफ रह चुके हैं मोहसिन रेजाई
रेजाई ने 16 साल तक (1981-97) तक IRGC के कमांडर इन चीफ के तौर पर काम किया. उन्होंने 27 साल की उम्र में इसकी कमान संभाली. तब इस्लामिक क्रांति को सिर्फ दो साल हुए थे. IRGC एक मिलिशिया से बदलकर कई ब्रांच की सैन्य शक्ति बन गया है. यह ईरान के सुरक्षा और आर्थिक क्षेत्रों पर हावी है.
रेजाई ईरान के राष्ट्रपति बनना चाहते थे, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली. 1997 के बाद उन्होंने एक्सपीडिएंसी डिस्सर्नमेंट काउंसिल के सचिव के तौर पर काम किया. यह 48 सदस्यों वाली एक सभा है, जो सीधे सर्वोच्च नेता को सलाह देती है. वह हमेशा राष्ट्रपति चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार के तौर पर जाने जाते हैं. उन्होंने साल 2005, 2009, 2013 और 2021 में राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली.
इधर, 2021 में चुने गए राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की 2024 में हवाई दुर्घटना में मौत हो गई. इसके बाद चुनाव हुए. इसमें मसूद पेजेशकियान की जीत हुई. मोहसिन रेजाई को साल 2025 में आर्थिक मामलों का उपराष्ट्रपति बनाया. लेकिन ईरान की बिगड़ते आर्थिक हालातों के चलते आलोचना हुई. इसी के चलते ईरान में प्रदर्शन ने जोर पकड़ा. रेजाई के खिलाफ इंटरपोल ने नोटिस जारी कर रखा है.
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