India-EU Trade Deal: अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता के बीच भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच ट्रेड डील फाइनल होने के करीब पहुंच चुकी है. उम्मीद है कि 27 दिसंबर को इस डील पर साइन होगी. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को कहा कि भारत और EU ने 24 में से 20 चैप्टर पर साइन कर दिए हैं और उनका लक्ष्य इस महीने के आखिर में EU नेताओं के भारत आने से पहले डील को पूरा करना है.
इस बार कौन होंगे रिपब्लिक डे के चीफ गेस्ट?
यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट, उर्सुला वॉन डेर लेयेन 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे. दोनों 27 जनवरी को 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भी करेंगे. विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी औपचारिक घोषणा की. एक्सपोर्टर्स के मुताबिक, भारत और 27 देशों वाले यूरोपियन यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स, जेम्स एंड ज्वेलरी के एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा.
दोनों देशों ने लंबा किया इंतजार
इंडस्ट्री का अनुमान है कि FTA की वजह से टैरिफ खत्म होने के बाद अगले तीन सालों में EU को एक्सपोर्ट दोगुना हो जाएगा. इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से एक्सपोर्टर्स को ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच एक स्थिर और भरोसेमंद फ्रेमवर्क के तहत कारोबार करने का मौका मिलेगा. इस डील के लिए दोनों ही देशों ने लंबा इंतजार किया. सबसे पहले 2007 में भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बात शुरू हुई थी. फिर साल 2013 में तत्कालीन भू-राजनीतिक हालातों की वजह से इस पर ब्रेक लग गया. इसके बाद जून 2022 में दोनों देशों ने इस दिशा में फिर से कदम बढ़ाया. अब जाकर यह फाइनल होने के करीब है.
अब तक का सबसे बड़ा डील
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) भारत का अब तक का सबसे बड़ा ट्रेड डील होगा. इसे एक ऐतिहासिक समझौता बताते हुए गोयल ने कहा, “मैंने अब तक सात डील की हैं. सभी विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ. यह उन सभी की मां होगी.” इससे दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश में काफी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है.
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ के बढ़ने से भारतीय एक्सपोर्ट की एक बड़ी रेंज प्रभावित हो रही है और यह एक्सपोर्ट मार्केट और ट्रेड स्ट्रेटेजी में डाइवर्सिफिकेशन की जरूरत को दिखाता है. उन्होंने कहा कि भारत-EU के बीच एक कॉम्प्रिहेंसिव फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करना न सिर्फ सही समय पर है, बल्कि यह स्ट्रेटेजिक रूप से भी बहुत जरूरी है.
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